JaunpurUttar Pradesh

#Jaunpur | कपड़ा प्रेस करने वाले रवि चौधरी के बेटे के जन्मदिन पर संस्था के लोगों ने पहुंचाया केक और चॉकलेट

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जौनपुर |लाक डाउन के दौरान कपड़ा प्रेस करने वाले रवि चौधरी और उसके परिवार के लोग उस समय खुशी से झूम उठे जब भोजन और राशन का पैकेट बांटने वाली संस्था के लोग उनके बेटे अंश के जन्मदिन का केक और चॉकलेट लेकर उनके घर पहुंचे | समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह की संस्था के लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए बच्चे के जन्मदिन में शामिल हुए |

बहुत कम लोग हैं जो गरीब बच्चों को खुशियां देते हैं -नीलम कनौजिया

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भोजन और राशन के पैकेट के साथ साथ गरीब बच्चों को खुशियां बांट रहे हैं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के संस्था के लोग

इस कार्य के लिए परिवार के लोगों ने संस्था का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया | समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह की संस्था द्वारा लॉक डाउन के दौरान गरीब परिवार के बच्चों को जन्मदिन का केक और चॉकलेट घर पर पहुंचाने का बीड़ा उठाया गया है |


देश में लॉक डाउन लागू होने के पहले दिन से ही श्रीमती अमरावती श्रीनाथ सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी ज्ञान प्रकाश सिंह द्वारा गरीबों,असहायों और जरूरतमंदो को भोजन और राशन का पैकेट वितरण किया जा रहा है |

भोजन का पैकेट वितरण के दौरान जब संस्था के शिवा सिंह और मयंक नारायण कल दिन में तारापुर कॉलोनी में रहने वाले रवि चौधरी के घर पहुंचे तो पता चला कि उनके बेटे अंश का जन्मदिन है |

रवि चौधरी को 7 वर्ष पूर्व लकवा मार गया था | किसी तरह कपड़े प्रेस करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं और उनकी पत्नी नीलम कनौजिया लोगों के घरों में खाना बना कर अपनी आजीविका चला रही है | उनके तीन लड़कियां और एक लड़का अंश (6 वर्ष) है | उनके बच्चे का जन्मदिन था |


अंश चौधरी ने बताया कि भोजन का पैकेट देने अंकल लोग रोज आते थे | जब उनको पता चला कि आज मेरा जन्मदिन है तो केक और चॉकलेट लेकर आए बहुत अच्छा लगा अंश की मां नीलम कनौजिया भावुक हो गईं | उन्होंने बताया कि खाना देने के लिए संस्था के लोग रोज आते थे, उनसे हम लोगों का पहचान हो गया |

उन्हें पता चला कि मेरे बेटे का जन्मदिन है, वह मेरे घर में आए | हम बहुत धन्य हो गए कि वो मेरे घर पर आए | बहुत अच्छा लगा कि उन्होंने मेरे बच्चे के जन्मदिन पर केक और चॉकलेट दिया | बहुत कम ही लोग हैं जो गरीब लोगों को खुशियां दे सकते हैं | मैं संस्था के लोगों का जितना आभार व्यक्त करूं कम है

मालूम हो कि लाक डाउन के चलते बहुत सारे लोगों ने नीलम से घरों का काम कराने से मना कर दिए | आर्थिक तंगी की वजह से वह चाहकर भी बच्चों को खुशियां नहीं दे पा रहे थे | इसी बीच संस्था के लोगों को पता लगा तो वह केक की व्यवस्था करके घर पर जाकर उस बच्चे का बर्थडे मनाया और उपहार भी दिया | सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए संस्था के दो व्यक्ति ही उनके घर केक लेकर गए और उसका बर्थडे उनके घर वालों के साथ मनाए |

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