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अब कदम पीछे नहीं हटेंगे, 80 सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ेगी : शिवपाल यादव |

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो गयी है वहीं उत्तर प्रदेश में होने वाली चुनावी जंग में अभी से लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। वजह साफ है प्रदेश की लोकप्रिय पार्टियों में से एक समाजवादी पार्टी से शिवपाल यादव का अलग होना और खुद की एक पार्टी बनाना। हाल ही में न्यूज 18 ग्रुप से हुए साक्षात्कार में शिवपाल यादव ने बेझिझक अपनी बात रखी और यह स्पष्ट कर दिया कि वह अब अपने कदम पीछे खींचने वाले नहीं है। यही नहीं उन्होंने अपनी अलग पार्टी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा की घोषणा कर महागठबंधन के लिए मुश्किलें भी बढ़ा दीं हैं। शिवपाल यादव ने कहा कि जो क़दम मैंने आगे बढ़ा लिया है, वो बढ़ गया है. आज तक मैंने जो भी काम किया है वो डंके की चोट पर किया है. आज तक मेरी पक्षधरता या समर्पण असंदिग्ध और स्पष्ट रही है. मैंने 30 साल तक लगातार संघर्ष किया है. खून पसीने से समाजवादी पार्टी बनाई. लेकिन वहां मेरी, नेता जी और लाखों समाजवादी साथियों की उपेक्षा हो रही थी.

उन्होंने कहा कि लोग अफवाहें फैला रहे है जबकि सच्चाई यह है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से कोई मीटिंग नहीं हुई है. दूसरी बात कि सभी जानते हैं कि राज्य में मेरे पास व्यापक जनाधार है, जाहिर है लोकतंत्र में ऐसे किसी भी व्यक्ति के पास राजनीतिक प्रस्ताव आते रहते हैं. हालांकि हम सेक्युलर ताकतों के साथ हैं, विकास के सही मायनों के साथ हैं. मैं भविष्य में भी कम्युनल ताकतों के साथ कोई समझौता नहीं करूंगा.

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जब उनसे यह पूछा गया कि आपने ख़ुद कभी कोई संसदीय चुनाव नहीं लड़ा. 2019 में मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद या बदायूं कहां से चुनाव लड़ेंगे? तो इस पर उन्होंने जवाब दिया कि इंतजार कीजिए, आने वाले कुछ दिनों में सारी तस्वीर साफ हो जाएंगी. जब उनसे पूछा गया कि अखिलेश से आपकी क्या शिकायत है तो उन्होंने जवाब दिया कि देखिए समाजवादी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा और राज्य में लगातार किसानों की उपेक्षा हो रही है. गरीबी बढ़ती जा रही है और देश में केवल 10-15 फ़ीसदी लोगों को ही लाभ मिल पाता है. सपा ने राज्य में स्थिति बिगड़ने के बावजूद भी इन मुद्दों पर कोई प्रदर्शन भी नहीं किया. इन वजहों से मुझे ये फ़ैसला लेना पड़ा. हम रहना चाहते थे पार्टी में लेकिन बहुत से लोगों को सम्मान नहीं मिल रहा था, उनकी उपेक्षा हो रही थी. बहुत इंतज़ार भी किया, प्रयास भी किया कि पार्टी में सब एक साथ रहें.

यही नहीं जब उनसे यह पूछा गया कि क्या आपकी नई पार्टी नेताजी की मर्ज़ी से बनी है ? उनसे पार्टी की घोषणा से पहले कोई बात हुई थी ? तो इस पर उन्होंने टालमटोल उत्तर दिया और कहा कि नेता जी का आशीर्वाद मुझे प्राप्त है. समझौते के सवाल पर कहा कि अब कदम पीछे खींचने का सवाल ही नहीं है. समाजवादी सेक्युलर मोर्चा 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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